वायरल हो रहे इस वीडियो में आप देखेंगे कि एक लड़की दुकान पर वेलेंटाइन डे का कार्ड लेने पहुंचती है. वो दुकानदार से कहती है कि कोई ऐसा कार्ड दो, जिस पर लिखा हो- तुम्ही मेरा पहला और आखिरी प्यार हो. इसके बाद वो ऐसी बात कहती है, जिसे सुनकर दुकानदार बौरा गया.
वेलेंटाइन डे नजदीक आ रहा है. प्यार में डूबे प्रेमी-प्रेमिका इसे यादगार बनाने के लिए अलग-अलग प्लानिंग में जुट जाते हैं. कोई अपनी गर्लफ्रेंड को मूवी डेट पर ले जाता है, तो कोई मॉल में खरीदारी करता है. कुछ लोग बर्फीली वादियों का आनंद उठाने के लिए दूसरे शहरों में भी जाते हैं. वहीं, कुछ लोग ग्रीटिंग कार्ड देकर एक-दूसरे से प्यार का इजहार करते हैं. ऐसा ही एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो में एक लड़की अपने प्रेमी के लिए वेलेंटाइन डे का कार्ड लेने पहुंचती है. वो दुकानदार से पूछती है कि क्या उसके पास कोई ऐसा कार्ड है, जिस पर लिखा हो- तुम्ही मेरा पहला और आखिरी प्यार हो?
लड़की की बातों को सुनकर दुकानदार उस कार्ड को निकालने चल देता है. इस बीच लड़की अपने अंगुलियों पर कुछ गिनती करती है. इसके बाद जो वो कहती है, उसे सुनकर दुकानदार बौरा गया होगा. अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर लड़की ने ऐसा क्या कह दिया, जो दुकानदार कंफ्यूज हो गया? ऐसे में आपको वीडियो देखना होगा. इस वीडियो में आप देखेंगे कि एक लड़की दुकानदार से कहती है कि भैया, क्या आपके पास वेलेंटाइन डे का कार्ड है, जिस पर लिखा हो कि तुम्ही मेरा पहला और तुम्ही मेरा आखिरी प्यार हो? दुकानदार लड़की की बातों को सुनकर कार्ड निकालने जाता है. इस बीच लड़की अपने हाथों पर गिनती करती है और दुकानदार से कहती है कि ऐसे 17 कार्ड दे दो. लड़की की बातों को सुनकर दुकानदार एक पल के लिए हतप्रभ रह जाता है, मानो वो बौरा गया.
अशिक्षा इस देश के लिए ,समाज के लिए कलंक है। बगैर समान शिक्षा और सभी को शिक्षा से जोड़े बगैर ये सम्भव नही है।
ये जिम्मेदारी सरकार को ही उठानी होगी। इसमे जो भी बाधाएं आती हो उन्हें कानूनी रूप से खत्म करने की भी जरूरत है। गरीब बच्चों के बीच कार्य करते हुए मैं देखता हूं कि कुछ मातापिता जान बूझकर बच्चो को स्कूल नही भेजते तथा बालश्रम और भिक्षावृत्ति की तरफ धकेलते है। ऐसे मातापिता को सजा का और सभी तरह की सरकारी सुविधाएं बन्द करने का प्रावधान होना चाहिए।
इसी प्रकार शिक्षक की भी जिम्मेदारी हो कि उसके क्षेत्र का कोई भी बच्चा स्कूली शिक्षा से बंचित न रहे। जो भी बाधा इसमे आये वह बिभाग को जानकारी दे और कानूनी रूप से वह हल होनी चाहिए।
अगर शिक्षक ऐसा न करे तो कर्तव्य में लापरवाही मान कर उसके खिलाफ भी कार्यवाही होनी चाहिए।
सारांश यह कि शिक्षा के बिना मानसिक विकास सम्भव नही..और बगैर मानसिक विकास के देश और समाज और स्वयं का विकास भी सम्भव नही।
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